लोकतांत्रिक संसदों, अंतर्राष्ट्रीय परिषदों और कॉर्पोरेट निदेशक मंडलों में अक्सर एक सहज किंतु भ्रामक अंकगणितीय धारणा मान ली जाती है: यह कि किसी पार्टी के पास मौजूद सीटों का प्रतिशत — या किसी शेयरधारक के पास मौजूद वोटिंग शेयरों का अनुपात — उसकी वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति (Voting Power) के सीधे समानुपाती होता है।
कल्पना कीजिए कि 100 सीटों वाली एक संसद में किसी विधेयक को पारित करने के लिए \(q = 51\) मतों के साधारण बहुमत की आवश्यकता है। मान लीजिए पार्टी A के पास 49 सीटें हैं, पार्टी B के पास 49 सीटें हैं, और एक अत्यंत छोटी तीसरी पार्टी C के पास केवल 2 सीटें हैं। टेलीविज़न के ग्राफ़िक्स में पार्टी A और B \(49\%\) हिस्सेदारी वाले विशालकाय दिग्गज दिखते हैं, जबकि \(2\%\) वाली पार्टी C नगण्य प्रतीत होती है। किंतु जब हम इस संसद का विश्लेषण सहकारी खेल सिद्धांत (Cooperative Game Theory) के कठोर गणित से करते हैं, तो एक चौंकाने वाला सत्य सामने आता है: पार्टी A, पार्टी B और पार्टी C तीनों के पास बिल्कुल समान मतदान शक्ति है — प्रत्येक के पास एक-तिहाई (\(33.33\%\))!
इसके विपरीत, किसी राजनीतिक दल या संप्रभु राष्ट्र के पास मतों का एक बड़ा हिस्सा होने के बावजूद उसकी गणितीय मतदान शक्ति पूर्णतः शून्य (\(0\%\)) हो सकती है — जिसे खेल सिद्धांत में डमी खिलाड़ी (Dummy Player) कहा जाता है। 1958 से 1973 तक यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) की मंत्रिपरिषद ने भारित मतदान प्रणाली \([12;\, 4, 4, 4, 2, 2, 1]\) का उपयोग किया। यद्यपि लक्ज़मबर्ग के पास 1 वोट (\(5.88\%\)) था, अन्य सभी पाँच देशों के वोट सम संख्या (\(4, 4, 4, 2, 2\)) में थे और बहुमत का कोटा भी सम (\(12\)) था। चूँकि सम संख्याओं का योग सदैव सम होता है, इसलिए किसी भी गठबंधन का योग \(11\) हो ही नहीं सकता था जिसे लक्ज़मबर्ग का 1 वोट \(12\) में बदल सके: पूरे 15 वर्षों तक लक्ज़मबर्ग की वास्तविक मतदान शक्ति ठीक \(0\%\) रही।
इस लेख में हम मतदान शक्ति सूचकांकों (Voting Power Indices) के संपूर्ण गणितीय सिद्धांत का निर्माण करेंगे: भारित मतदान खेलों का स्वयंसिद्ध सूत्रीकरण, बंज़ाफ़ शक्ति सूचकांक (Banzhaf Index), शापले-शुबिक शक्ति सूचकांक (Shapley-Shubik Index), स्ट्रैफ़िन का प्रायिकता प्रमेय, जनक फलन (Generating Functions) एल्गोरिदम, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का वीटो ढाँचा और पुनर्वितरण के विरोधाभास।
1. सीट अनुपात का भ्रम: तीन विचार प्रयोग
आइए कुल \(W = 100\) सीटों और बहुमत कोटा \(q = 51\) वाली तीन संसदों पर विचार करें:
- किंगमेकर (Kingmaker) \([51;\, 49, 49, 2]\): कोई भी दल अकेले 51 सीटों तक नहीं पहुँच सकता। विजयी गठबंधन \(\{A, B\}(98)\), \(\{A, C\}(51)\), \(\{B, C\}(51)\) और \(\{A, B, C\}(100)\) हैं। चूँकि किन्हीं भी दो दलों का गठबंधन जीत जाता है, यह खेल एक-व्यक्ति-एक-वोट वाली समिति \([2;\, 1, 1, 1]\) के पूर्णतः तुल्यकारी (Isomorphic) है। मात्र \(2\%\) सीटों के साथ पार्टी C के पास A और B के बराबर \(33.33\%\) निर्णय शक्ति है।
- तानाशाह और शक्तिहीन विपक्ष \([51;\, 52, 47, 1]\): चूँकि \(w_A = 52 \ge 51\), पार्टी A एक तानाशाह (Dictator) है जिसके पास \(100\%\) शक्ति है। यद्यपि पार्टी B के पास सदन की \(47\%\) सीटें हैं, फिर भी वह C के साथ मिलकर भी (\(47 + 1 = 48 < 51\)) किसी कानून को पारित या अवरुद्ध नहीं कर सकती: B और C डमी खिलाड़ी (\(0\%\) शक्ति) हैं।
- अदृश्य डमी खिलाड़ी और नासाउ काउंटी मामला (1965) \([51;\, 35, 35, 25, 5]\): यहाँ किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। किंतु अन्य तीन दलों \(\{A, B, C\}\) (भार \(35, 35, 25\)) के सभी उपसमुच्चयों के संभावित योग केवल \(0, 25, 35, 60, 70, 95\) हैं। कोई भी उपसमुच्चय क्रांतिक अंतराल \([q - w_D,\, q - 1] = [46, 50]\) के बीच योग नहीं देता! फलस्वरूप पार्टी D की \(5\) सीटें कभी भी हार को जीत में नहीं बदल सकतीं और उसकी शक्ति \(0\%\) है। 1965 में युवा विधि छात्र जॉन एफ़. बंज़ाफ़ (John F. Banzhaf III) ने इसी गणित से सिद्ध किया कि न्यूयॉर्क के नासाउ काउंटी बोर्ड में तीन नगरों की मतदान शक्ति \(0\%\) थी।
2. गणितीय सूत्रीकरण: बंज़ाफ़ और शापले-शुबिक सूचकांक
सरल खेल और भारित मतदान खेल
\[v(S) = \begin{cases} 1 & \text{यदि } \sum_{i \in S} w_i \ge q \quad (\text{विजयी गठबंधन}) \\ 0 & \text{यदि } \sum_{i \in S} w_i < q \quad (\text{पराजित गठबंधन}) \end{cases}\]किसी गठबंधन \(S\) में खिलाड़ी \(i \in S\) को क्रांतिक या निर्णायक मतदाता (Critical / Swing Voter) कहा जाता है यदि \(v(S) = 1\) किंतु \(v(S \setminus \{i\}) = 0\), अर्थात् \(\Delta_i v(S) = v(S) - v(S \setminus \{i\}) = 1\)।
flowchart TD
A["भारित मतदान खेल [q; w₁, w₂, ..., wₙ]"] --> B["गठबंधन का भार w(S) = Σ_{i∈S} wᵢ"]
B --> C{"क्या w(S) ≥ q है?"}
C -- "हाँ: v(S) = 1" --> D["विजयी गठबंधन S ∈ W"]
C -- "नहीं: v(S) = 0" --> E["पराजित गठबंधन S ∉ W"]
D --> F{"क्या खिलाड़ी i को हटाने पर भार q से कम हो जाता है: w(S \ {i}) < q?"}
F -- "हाँ: v(S \ {i}) = 0" --> G["खिलाड़ी i गठबंधन S में क्रांतिक (Swing Voter) है"]
F -- "नहीं: v(S \ {i}) = 1" --> H["खिलाड़ी i गठबंधन S में अतिरिक्त (Surplus) है"]
G --> I["बंज़ाफ़ सूचकांक βᵢ: सभी 2ⁿ⁻¹ उपसमुच्चयों में स्विंग ηᵢ की गणना करता है"]
G --> J["शापले-शुबिक सूचकांक φᵢ: सभी n! क्रमचयों में पिवट (Pivot) की गणना करता है"]
1. बंज़ाफ़ शक्ति सूचकांक (Penrose 1946 / Banzhaf 1965)
\[\beta'_i = \frac{\eta_i}{2^{n-1}}, \qquad \beta_i = \frac{\eta_i}{\sum_{j=1}^n \eta_j}\]2. शापले-शुबिक शक्ति सूचकांक (Shapley & Shubik 1954)
\[\phi_i = \sum_{S \subseteq N \setminus \{i\}} \frac{|S|!\,(n - |S| - 1)!}{n!} \bigl[v(S \cup \{i\}) - v(S)\bigr]\]3. \([6;\, 4, 3, 2, 1]\) में चरण-दर-चरण तुलना और जनक फलन
खेल \([6;\, 4, 3, 2, 1]\) (\(w_A=4, w_B=3, w_C=2, w_D=1\), कुल भार \(10\), कोटा \(q=6\)) में सभी 7 विजयी गठबंधनों और 24 क्रमचयों की गणना से निम्नलिखित परिणाम मिलते हैं:
| विजयी गठबंधन \(S\) | भार \(w(S)\) | सदस्य हटाने पर भार \(w(S \setminus \{i\})\) | क्रांतिक खिलाड़ी (Swing) | दल | वोट अनुपात | स्विंग \(\eta_i\) | प्रसामान्यीकृत बंज़ाफ़ \(\beta_i\) | पिवट (\(/24\)) | शापले-शुबिक \(\phi_i\) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| \(\{A, B\}\) | \(7\) | \(-A:3,\ -B:4\) | A, B | A (\(w_A=4\)) | \(40.0\%\) | \(5\) | \(5/12 \approx \mathbf{41.67\%}\) | \(10\) | \(10/24 \approx \mathbf{41.67\%}\) |
| \(\{A, C\}\) | \(6\) | \(-A:2,\ -C:4\) | A, C | B (\(w_B=3\)) | \(30.0\%\) | \(3\) | \(3/12 = \mathbf{25.00\%}\) | \(6\) | \(6/24 = \mathbf{25.00\%}\) |
| \(\{A, B, C\}\) | \(9\) | \(-A:5,\ -B:6,\ -C:7\) | A | C (\(w_C=2\)) | \(20.0\%\) | \(3\) | \(3/12 = \mathbf{25.00\%}\) | \(6\) | \(6/24 = \mathbf{25.00\%}\) |
| \(\{A, B, D\}\) | \(8\) | \(-A:4,\ -B:5,\ -D:7\) | A, B | D (\(w_D=1\)) | \(10.0\%\) | \(1\) | \(1/12 \approx \mathbf{8.33\%}\) | \(2\) | \(2/24 \approx \mathbf{8.33\%}\) |
| \(\{A, C, D\}\) | \(7\) | \(-A:3,\ -C:5,\ -D:6\) | A, C | कुल | \(100\%\) | \(12\) | \(100.00\%\) | \(24\) | \(100.00\%\) |
| \(\{B, C, D\}\) | \(6\) | \(-B:3,\ -C:4,\ -D:5\) | B, C, D | ||||||
| \(\{A,B,C,D\}\) | \(10\) | किसी को हटाने पर \(\ge 6\) | कोई नहीं |
यद्यपि पार्टी B (\(30\%\)) के पास पार्टी C (\(20\%\)) की तुलना में डेढ़ गुना सीटें हैं, फिर भी दोनों सूचकांकों के अनुसार B और C की मतदान शक्ति बिल्कुल बराबर (\(25.00\%\)) है! इसके विपरीत, \([5;\, 3, 2, 1, 1]\) में दोनों सूचकांक भिन्न परिणाम देते हैं: \(\beta = (50\%, 30\%, 10\%, 10\%)\) बनाम \(\phi = (58.33\%, 25.00\%, 8.33\%, 8.33\%)\)। स्ट्रैफ़िन के प्रमेय (1977) के अनुसार बंज़ाफ़ सूचकांक स्वतंत्रता की मान्यता और शापले-शुबिक सूचकांक समरूपता की मान्यता (\(p_1 = \dots = p_n = p \sim \mathrm{Uniform}(0,1)\)) के संगत है।
\[P_{-i}(x) = \prod_{j \ne i} \left(1 + x^{w_j}\right) = \sum_{k} c_k^{(i)} x^k \implies \eta_i = \sum_{k=q-w_i}^{q-1} c_k^{(i)}\]4. वास्तविक संस्थाएं और मतदान शक्ति के विरोधाभास
1. EEC मंत्रिपरिषद (1958–1973) \([12;\, 4, 4, 4, 2, 2, 1]\)
लक्ज़मबर्ग (\(w_{\text{Lux}} = 1\), कोटा \(q = 12\)) के लिए जनक बहुपद \(P_{-\text{Lux}}(x) = (1 + x^4)^3(1 + x^2)^2\) में केवल सम घातें आती हैं, इसलिए \(x^{11}\) का गुणांक \(0\) है (\(\beta_{\text{Lux}} = \phi_{\text{Lux}} = 0\%\))। किंतु 1973 में जब EEC का विस्तार 9 देशों तक हुआ (\([41;\, 10, 10, 10, 10, 5, 5, 3, 3, 2]\)), तो लक्ज़मबर्ग का वोट हिस्सा \(5.88\%\) से घटकर \(3.45\%\) होने के बावजूद उसकी बंज़ाफ़ शक्ति \(0\%\) से बढ़कर \(1.62\%\) हो गई (नए सदस्यों का विरोधाभास, Brams & Affuso 1976)।
2. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (P5 का वीटो अधिकार)
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (वीटो सहित 5 स्थायी सदस्य P5 और 10 अस्थायी सदस्य NP10, पारित होने के लिए सभी 5 P5 सहित कुल 9 मत) भारित खेल \([39;\, 7, 7, 7, 7, 7, 1, 1, 1, 1, 1, 1, 1, 1, 1, 1]\) के तुल्य है।
- बंज़ाफ़ सूचकांक: \(\eta_{\text{P5}} = \sum_{k=4}^{10} \binom{10}{k} = 848\), \(\eta_{\text{NP}} = \binom{9}{3} = 84 \implies \beta_{\text{P5}} = \frac{848}{5080} \approx \mathbf{16.69\%}\) और \(\beta_{\text{NP}} = \frac{84}{5080} \approx \mathbf{1.65\%}\)।
- शापले-शुबिक सूचकांक: एक अस्थायी सदस्य केवल 9वें स्थान पर ही पिवट बन सकता है जब उससे पहले सभी 5 P5 और ठीक 3 अन्य NP सदस्य हों: \(\phi_{\text{NP}} = \binom{9}{3}\frac{8!\,6!}{15!} = \frac{84}{45045} = \frac{4}{2145} \approx \mathbf{0.1865\%}, \qquad \phi_{\text{P5}} = \frac{421}{2145} \approx \mathbf{19.627\%}\) पाँच स्थायी सदस्यों के पास कुल शापले-शुबिक शक्ति का \(98.135\%\) हिस्सा है (प्रत्येक P5 सदस्य की शक्ति एक अस्थायी सदस्य से 105.25 गुना अधिक है)!
flowchart TD
P["भारित मतदान खेलों के अरेखीय विरोधाभास"] --> P1["1. नए सदस्यों का विरोधाभास (Brams & Affuso 1976)"]
P --> P2["2. पार्टी विभाजन का विरोधाभास (Large Size)"]
P --> P3["3. पुनर्वितरण का विरोधाभास (Fischer & Schotter 1978)"]
P1 --> D1["नए सदस्यों के जुड़ने से पुराने सदस्य का वोट प्रतिशत घटने पर भी उसकी शक्ति बढ़ सकती है (लक्ज़मबर्ग 1973: 0% → 1.6%)"]
P2 --> D2["एक बड़ी पार्टी के दो गुटों में बँटने पर उनकी संयुक्त मतदान शक्ति पहले से अधिक हो सकती है"]
P3 --> D3["चुनाव में अपनी आधी सीटें गँवाने वाली पार्टी की वास्तविक मतदान शक्ति दोगुनी हो सकती है"]
3. पुनर्वितरण का विरोधाभास (Fischer & Schotter 1978)
14 सीटों वाली संसद (कोटा \(q = 9\)) की चुनाव से पहले और बाद की स्थिति की तुलना करें:
- चुनाव से पहले \([9;\, 6, 4, 2, 2]\): न्यूनतम विजयी गठबंधन केवल \(\{A, B\}(10)\) और \(\{A, C, D\}(10)\) हैं; पार्टी A के पास वीटो शक्ति है। पार्टी D (\(2\) सीटें) की शक्ति \(\beta_D = 10.00\%\) और \(\phi_D = 8.33\%\) है।
- चुनाव के बाद \([9;\, 5, 5, 3, 1]\): A अपनी 1 सीट B को गँवा देता है, और पार्टी D अपनी आधी सीटें (\(2 \to 1\)) C को गँवा देती है। परंतु अब \(\{B, C, D\}\) का योग \(5+3+1=9\) हो जाता है और यह एक नया विजयी गठबंधन बन जाता है! पार्टी A का वीटो एकाधिकार टूटने से 1 सीट वाली पार्टी D अब दो गठबंधनों (\(\{A, C, D\}\) और \(\{B, C, D\}\)) के लिए अनिवार्य किंगमेकर बन जाती है: उसकी शक्ति उछलकर \(\beta_D = \mathbf{16.67\%}\) और \(\phi_D = \mathbf{16.67\%}\) हो जाती है — सीटें आधी, किंतु शक्ति दोगुनी!
अंत में, द्वि-स्तरीय संघीय प्रणालियों के लिए पेनरोज़ का वर्गमूल नियम (Penrose Square Root Law, 1946) सिद्ध करता है कि प्रत्येक नागरिक को उसके राज्य की जनसंख्या \(P_k\) से स्वतंत्र समान अप्रत्यक्ष प्रभाव देने के लिए प्रत्येक राज्य का बंज़ाफ़ सूचकांक \(\beta'_k\) उसकी जनसंख्या के वर्गमूल \(\sqrt{P_k}\) के समानुपाती होना चाहिए।
